Posted by: प्रदीप on: जनवरी 27, 2009
सादा-जीवन उच्च-विचार वाली समझ भारतीय समाज से धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही है, समय का चक्र जिस तिव्रता से घूम रहा है और जिस दिशा मे घूम रहा है उस से इतना तो निश्चित ही अहसास हो जाता है कि हमारा समाज बे-तरतीब, असंतुलित और अव्यवहारिक विकास के भ्रम जाल मे उलझता जा रहा है। [...]